यूपीए सरकार चाहती तो घोटाला रोक सकती थी : पीएनबी के पूर्व निदेशक

नई दिल्ली: पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व निदेशक दिनेश दुबे में कहा है कि कांग्रेस की अगुवाई में चल रही केंद्र में यूपीए की सरकार चाहती तो अपने शासनकाल में इस 11,300 करोड़ घोटाले को रोक सकती थी. उन्होंने कहा कि पीएनबी घोटाले को लेकर जिन कंपनियों की सीबीआई जांच कर रही है उनमें से एक गीतांजलि जेम्स को लेकर मैंने यूपीए सरकार के समय सवाल उठाए थे. दिनेश दुबे ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा, मैंने साल 2013 में गीतांजलि जेम्स को लोन देने के फैसले पर अगाह करते हुए केंद्र सरकार और आरबीआई को पत्र लिखा था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. मुझे निर्देश दिया कि यह लोन पास होना है. मेरे ऊपर दबाव डाला जा रहा था जिससे मैंने इस्तीफा दे दिया.

पीएनबी घोटाले में चौतरफा घिरी बीजेपी ने राहुल गांंधी और ‘गीतांजलि जेम्स’ के रिश्ते पर उठाए सवाल

मिली जानकारी के मुताबिक इस चिट्ठी में दिनेश दुबे ने लिखा था कि पहले गीतांजलि जेम्स को 1500 करोड़ रुपये वापस करने चाहिए तभी लोन पास किया जा सकता है. आपको बता दें कि गीतांजलि समूह के प्रमोटर मेहुल चोकसी नीरव मोदी के रिश्तेदार हैं.पीएनबी घोटाला में चौतरफा हमला झेल रही बीजेपी अब दिनेश दुबे के इस खुलासे को आधार मानकर जोरशोर से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साध रही है. बीजेपी की ओर से केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा, ‘”राहुल गांधी ने 13 सितंबर, 2013 को दिल्ली स्थित गीतांजलि जेम्स के एक कार्यशाला में शिरकत की थी और इसके एक दिन बाद यानी 14 सितंबर को ऋण के मामले में इलाहबाद बैंक के साथ बैठक हुई और एक और बैठक के बाद 17 सिंतबर को कंपनी को 1550 करोड़ रुपये का ऋण पास किया.” जावड़ेकर ने कहा कि वर्ष 2013 में इलाहबाद बैंक के स्वतंत्र निदेशक दिनेश दुबे के इस मामले में आवाज उठाने के बावजूद, गीतांजलि जेम्स को ऋण दे दिया गया

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